संघर्ष की आग
चल पड़ा हूँ राहों में, काँटों की चुभन के साथ,
हर कदम पे अंधेरे हैं, पर दिल में है विश्वास।
तूफ़ानों ने रोका बहुत, हवाओं ने तोड़ा है,
पर हर बार मैंने ख़ुद को, और मज़बूत जोड़ा है।
मंज़िलें दूर सही, पर हौसला साथ है,
टूट जाएँ सारे सपने, फिर भी दिल में बात है।
कि रुकना नहीं, झुकना नहीं,
हर ठोकर से कुछ सीखना है, डर को अंदर से चीर देना है।
हर दर्द एक सबक बना, हर आँसू ने ताक़त दी,
जिसने हँस के सह लिया, उसी को दुनिया ने इज़्ज़त दी।
संघर्ष ही है असली पूजा, यही सबसे बड़ा व्रत है,
जो हार के भी चलता रहा, वही असली विजेता है।
मत पूछो कितनी रातें जागा हूँ,
मत जानो कितनी बार टूटा हूँ।
बस इतना समझ लो कि आज खड़ा हूँ,
क्योंकि हर बार फिर से खुद से जुड़ा हूँ।
जब रास्ता ना दिखा, तो खुद ही राह बनाई,
ठोकरें खाकर भी मैंने, मुस्कान सजाई।
लोग कहते रहे “ये नहीं होगा तुझसे”,
मैं हर 'ना' के जवाब में, 'हाँ' बनकर उभरा हूँ उससे।
कभी पेट खाली था, जेब भी वीरान थी,
फिर भी आँखों में सपना था, और सीने में जान थी।
धूप ने जलाया, बारिश ने भिगोया,
लेकिन अंदर का जुनून, हर मौसम से भिड़ गया, हर डर से लड़ गया।
हाँ, मैं गिरा था कई बार ज़मीन पर,
पर ज़मीन से ही तो आसमाँ को जाना है।
खुद को जितना तोड़ा, उतना ही गढ़ा,
तभी तो अब चट्टान बन जाना जाना है।
संघर्ष मेरा साथी है, साया है मेरी राहों का,
ये ही तो मतलब है मेरे जिंदा रहने का।
जो हार कर भी उठ जाए, वही असली ज़िंदा है,
वरना सांसें तो पत्थर में भी चलती हैं, पर वो बेजान ज़िंदा है।
तो ऐ ज़िंदगी! अब जितना चाहे आज़मा ले,
मैं तैयार हूँ, अब खुद को पहचान ले।
मैं न थमूँगा, न रुकूँगा, न किसी से डरूँगा,
अब हर जंग जीत कर, खुद को मुक़म्मल करूँगा।