रौशनी की आस

धूप-छाँव के खेल में उम्र गुजरती रही,

हर दिन एक नया सवाल बनकर उभरती रही।

कभी मुस्कुराहटों में छुपा दर्द भी था,
कभी खामोशी में भी इक इबादत सी थी।

चलते गए हम अकेले पगडंडियों पे,
ना कोई साया, ना कोई साथ था।
हवा भी सवालों की तरह टकराई,
हर साँस में एक अनकहा बात था।

https://www.profitableratecpm.com/m7vf9esud?key=b48a2a2ac2afc738a5ad6a52597e1c0a

कभी सपनों ने धोखा दिया,
कभी अपनों ने पीठ मोड़ ली,
पर एक उम्मीद थी सीने में दबी,
जो हर तूफ़ान में भी ना टूटी, ना छोड़ी।

https://www.profitableratecpm.com/m7vf9esud?key=b48a2a2ac2afc738a5ad6a52597e1c0a

टूटी शाखों से भी फूल खिलते देखे,
जलते जंगल में भी हरियाली की आहट सुनी।
हर पतझड़ में बसंत की खुशबू समेटी,
और हर हार में जीत की दस्तक जानी।

जीवन के इस लंबे सफर में जाना,
हर मोड़ इक नया सबक होता है।
जो गिरने से डर गया, वो क्या जिएगा?
जो रुका नहीं, वही तो चलता रहेगा।

आँखों के आँसू भी अब थक चुके हैं,
पर दिल की बात कहने को तड़पते हैं।
कभी सोचता हूँ — क्या यही है किस्मत?
या अभी और भी मंज़िलें बाकी हैं?

एक चिंगारी बची है सीने में अब भी,
जो राख से उठकर शोला बन सकती है।

एक ख्वाब है जो बंद पलकों में पलता है,
जो जागते ही हक़ीकत बन सकता है।

रात चाहे जितनी भी काली हो जाए,
सुबह की किरण ज़रूर आती है।
उम्मीद की लौ जब साथ हो,
तो तन्हाई भी सुकून दे जाती है।


तो चलो, फिर से चलें उस दिशा में,
जहाँ रौशनी इंतज़ार कर रही है।
ज़िंदगी से हार मानने वालों में नहीं,
हम तो वो हैं जो अंधेरे में भी आस भरते हैं।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

संघर्ष की आग